एक कैदी का जीवन
एक कैदी का जीवन ।
एक कैदी की ज़िंदगी घर में रखे बर्तन की तरह होती है। वो बाहर कहीं जा नही सकता और इच्छा किसी को बता नहीं सकता, आजाद कभी हो नही सकता। और अपने मालिक के लिए रोज खाने के लिए झूठा होता है।
रोज उसको रगड़ते रहते है। काम में लेते रहते है।
वो हर रोज अंदर से टूटता रहता है।और हर दिन एक नए रोज का इंतजार करता रहता है। इस बुरे वक्त में जो समझ जाता है वो अपनी ज़िंदगी की एक नए दिन नई शुरुआत करता है।जो नही समझता है वो ज़िंदगी भर जेल की सलाखों के पीछे ही रहता है।
क्यू की वो अपराध का रास्ता नहीं छोड़ता है।तो बार बार वही जेल उसका घर बन जाती है।
हर इंसान के अंदर एक जुनून और जागृति होती है।
बस उसका उपयोग केसे करते है वो अपने उपर निर्भर करता है।की हम उसका सदूपयोग करे या दुरुपयोग ।
भगवान श्री कृष्ण ने कहा है। की जो अधर्म और अन्याय का रास्ता अपनाएगा उसको प्रभु स्वर्ग अथवा भगवन अपने चरणों में जगह नहीं देगे। और उसकी आत्मा और मन जीवन भर असंतोष और तकलीफों भरा होगा।
तो कैदी का जीवन भी कुछ ऐसा ही है अगर वो अपने द्वार किए गए अन्याय और अपराध का अगर पश्चाताप करता है। और धर्म का रास्ता अपना लेता है तो ईश्वर उसको भी माफ कर देता है।
जेल की जिंदगी बहुत ही तकलीफों भरी और मन को शांत रखने के लिए संघर्ष भरी है।
जेल में मन बार बार विचलित होता है।
में क्या करू केसे करू ये वो हजारों सवाल मन में उठने लगते है।
ऐसे वक्त में इंसान को मन से कठोर बनाना बहुत ही मुश्किल होता है।
अगर इस वक्त को वो कैदी समझ कर और मन में संतोष कर लेता है उसकी राह और आसान हो जाती है।
मेरे कहने का तात्पर्य यह है। इंसान में परिस्थितियां कैसी भी हो हिम्मत नही हारनी चाहिए। एक दिन नया सवेरा जरुर होता है।
शान्ति और संतोष से सोचना चाहिए। और कर्म करते रहना चाहिए।
एक दिन उसका फल जरूर मिलता है।
जय श्री राम।
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Super Cøp Ràksá ( RAKESH BISHNOI )
जोधपुर राजस्थान
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