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सफलता की तरह कोई भी सफल नही होता

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सफलता की तरह कोई भी सफल नही होता https://supercopraksa.blogspot.com/  आप किनके साथ अपना समय बिताना चाहेगे  .व्यक्ति , जो कि निराशावादी , शंकालु और उदास रहता है और हमेशा इस बात के प्रति आश्वस्त रहता है कि आकाश में प्रकट होनेवाला एक मात्र बादल तूफान ही लाएगा ।  • वह व्यक्ति , जो कि आशावादी है और आत्म - विश्वास व उल्लास पूर्ण रहता है और हमेशा किसी भी समस्या का सामना करने , समाधान ढूँढ़ने फायदों में उत्तरोत्तर वृद्धि करने में समर्थ रहता है । आपको पता चल जाएगा कि पी.एम.ए. के कारण आप दूसरे लोगों के साथ मित्रता करने और उनका सहयोग प्राप्त करने में बाधाओं पर विजय प्राप्त करने और समस्याओं को अवसरों में परिवर्तित करने में समर्थ होते हैं । हम सभी अपनी आदतों के गुलाम हैं । आपकी आदतें और उनका प्रभाव या तो सकारात्मक हैं या नकारात्मक , यह आपकी रुचियों पर निर्भर करता है । आप अपने मस्तिष्क पर नकारात्मक विचारों को हावी न होने देने का फैसला कर सकते हैं । आप नकारात्मक विचारों और भावों को , वे जब भी उत्पन्न हों , के स्थान पर सकारात्मक भाव और विचार उत्पन्न कर सकते हैं । सकारात्मक आद...

भीष्म पितामह की जीवनी / सुविचार

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भीष्म पितामह की जीवनी SupercopRaksa.Blogspot.com SupercopRaksa.Blogspot.com नाम: -- देवव्रत जन्म माघ कृष्णपक्ष की नौमी अन्य नाम: -- भीष्म, गंगापुत्र, पितामह संदर्भ ग्रंथ: -- महाभारत, श्रीमद्भगवद्गीता, पुराण जन्म स्थल: -- हस्तिनापुर व्यवसाय: -- क्षत्रिय मुख्य शस्त्र: धनुष बाण राजवंश: _- कुरुवंश माता-पिता: -- गंगा और राजा शान्तनु भाई-बहन: -- वेदव्यास , चित्रांगद और विचित्रवीर्य ( सभी सौतेले भाई) जीवनसाथी: -- ब्रम्हचर्य जीवन संतान: -- ब्रम्हचर्य जीवन SupercopRaksa.Blogspot.com भीष्म अथवा भीष्म पितामह महाभारत के सबसे महत्वपूर्ण पात्रों में से एक थे। भीष्म महाराजा शान्तनु के पुत्र थे महाराज शांतनु की पटरानी और नदी गंगा की कोख से उत्पन्न हुए थे | उनका मूल नाम देवव्रत था। भीष्म में अपने पिता शान्तनु का सत्यवती से विवाह करवाने के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने की भीषण प्रतिज्ञा की थी | अपने पिता के लिए इस तरह की पितृभक्ति देख उनके पिता ने उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान दे दिया था | इनके दूसरे नाम गाँगेय, शांतनव, नदीज, तालकेतु आदि हैं। भीष्म पितामह महाभारत काल के धर्म पर चलने वाले ...

Karma and Dharma and Life's mool Mantra

  supercopraksa.blogspot.com   Karma and Dharma have great importance in our life.  And a person keeps doing karma throughout his life. Whether he does good deeds or bad, it depends on that person.  And if we talk about religion, then between the human race and the religions created on the earth, it continues throughout life with hatred towards each other. And want to humiliate each other. And among these there are some people who do not believe in caste and religion. Follows only one religion. That is religion, human beings consider humanity and humanity as religion and should also be believed.  Throughout life a person runs after money. And it is also necessary because money is also necessary in today's time to raise a family.  But while running after money, you do not forget your religion. Go. You do not forget humanity and humanity. Whose income in the house fills the stomach of the whole family. If that person, while doing his work, indulges in...

परमात्मा ही सब कुछ है।

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गुरु देव जम्भेश्वर भगवान की शब्दवाणी 🙏 गुरु महाराज जम्भेश्वर भगवान स्वयं विष्णु के अवतार माने जाते है। गुरु महाराज ने अपनी  शब्दवाणी  में कहा था, की जब धरती पर कुछ नही था , चारो तरफ अंधकार ही अंधकार था, ना सूर्य था, न चंद्र था, ना सागर था ना अग्नि थी, ना धरती थी ना शेष नाग था, सब कुछ छोटे छोटे कणों में विलीन था, जब कुछ नही था तब भी मैं था। इसका तात्पर्य यह है की गुरु महाराज जम्भेश्वर भगवान स्वयं ही परमात्मा थे। उन्होंने धरती पर धर्म की स्थापना के लिए अवतार लिया  उन्होंने कहा कि   ब्रह्मा,विष्णु, महेश, श्री राम, हनुमान, परशुराम, श्री कृष्ण, सब परमात्मा के ही रूप है। जितने भी अवतार हुए सब परमात्मा परमेश्वर के ही रूप है। या ये कहो ये सब स्वयं  परमात्मा ही थे। यानी ईश्वर/परमात्मा एक है। उनके रूप अनेक है। https://supercopraksa.blogspot.com https://supercopraksa.blogspot.com गुरु महाराज जम्भेश्वर भगवान की जीवनी इनका जन्म राजस्थान के नागौर परगने के पीपासर गांव में एक राजपूत परिवार में विक्रमी संवत् 1508 सन 1451 भादवा वदी अष्टमी को अर्धरात्रि कृतिका ...

खाकी

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supercopraksa.blogspot.com खाकी     _____शब्द आते ही मन में पुलिस की वर्दी की याद आती है। क्यू की ये शब्द पुलिस से जुड़ा हुआ है। एक पुलिस कर्मी के जीवन में खाकी का बहुत महत्व है। और वो महत्व वो खाकी पहनने वाला ही जान सकता है। एक पुलिस कर्मी जीवन पर्यन्त खाकी की आन बान शान के लिए कार्य करता है। और जनता और न्याय के रक्षण के लिए भाग दौड़ करता रहता है। लेकिन इस भागदौड़ के समय उसकी परिवार और समाज , मित्रों,और बच्चो से दूरी बन जाती है। और कभी कभी ये दूरी दुख और तकलीफों का कारण बन जाती है। क्यों की एक पुलिस कर्मी के सर पर इतना काम का बोझ होता है वो इस बोझ को कभी हल्का कर ही नही पाता है। क्यू की पुलिस की कार्यप्रणाली इतनी लंबी है की एक इंसान को अनेकों काम और तरह तरह की ड्यूटी करनी पड़ती है।  दूसरे विभाग होने के बावजूद उन विभागो के कई कार्य पुलिस पर थोपे जाते है।और कई बार किसी के कार्य को पुलिस को करना पड़ता है और उसका नुकसान भी पुलिस ही उठाती है। ये 100% सच्चाई है। जैसे _खनिज विभाग होते हुए भी बजरी खनन, पत्थर खनन और अवैध खनन की  खनिज विभाग कार्यवाही नही करता...

ज़िंदगी के 21 मूल मंत्र और जीवन की कुछ योग्य बाते

supercopraksa.blogspot.com ✍️हमारे जीवन में कर्म और धर्म का बहुत महत्व है। और जीवन भर एक इंसान कर्म करता रहता है। चाहे वो अच्छे कर्म करे या बुरे वो उस इन्सान पर निर्भर करता है। और बात करे धर्म की तो इंसान जात पात और धरती पर बनाए गए धर्मो के बीच एक दूसरे के प्रति घर्णा भाव भर कर जीवन भर चलता रहता है। और एक दूसरे को नीचा दिखाना चाहते हैं। और इन्ही में से कुछ ऐसे भी लोग है जो जात पात और धर्मो को ना मान कर । एक ही धर्म को मानता है। वो धर्म होता है इंसान में मानवता ओर इंसानियत को ही धर्म मानते है और मानना भी चाहिए। जीवनभर इंसान पैसे के पीछे भागता रहता है। और जरूरी भी है क्यू की परिवार पालने के लिए आज के वक्त में पैसा भी आवश्यक है। लेकिन  पैसों के पीछे भागते भागते कही आप अपने धर्म को नही भूल।जाओ।आप मानवता और इंसानियत को नही भूल जाओ। क्यू घर में जिसके कमाने से पूरे परिवार का पेट भरता है। अगर वो इंसान अपना कर्म करते समय अन्याय, अनीति,दुर्भावना ,किसी दूसरे का हक छनकर कमाना, या किसी का नुकसान करके खुद का फायदा करना, या गलत तरीके से अर्जित किया हुआ धन जिससे वो अपने परिवार को पालता है। उस कर्म...

एक कैदी का जीवन

एक कैदी का जीवन ।   एक कैदी की ज़िंदगी घर में रखे बर्तन की तरह होती है। वो बाहर कहीं जा नही सकता और इच्छा किसी को बता नहीं सकता, आजाद कभी हो नही सकता। और अपने मालिक के लिए रोज खाने के लिए झूठा होता है। रोज उसको रगड़ते रहते है। काम में लेते रहते है। वो हर रोज अंदर से टूटता रहता है।और हर दिन एक नए रोज का इंतजार करता रहता है। इस बुरे वक्त में जो समझ जाता है वो अपनी ज़िंदगी की एक नए दिन नई शुरुआत करता है।जो नही समझता है वो ज़िंदगी भर जेल की सलाखों के पीछे ही रहता है। क्यू की वो अपराध का रास्ता नहीं छोड़ता है।तो बार बार वही जेल उसका घर बन जाती है। हर इंसान के अंदर एक जुनून और जागृति होती है। बस उसका उपयोग केसे करते है वो अपने उपर निर्भर करता है।की हम उसका सदूपयोग करे या दुरुपयोग । भगवान श्री कृष्ण ने कहा है। की जो अधर्म और अन्याय का रास्ता अपनाएगा उसको प्रभु स्वर्ग अथवा भगवन अपने चरणों में जगह नहीं देगे। और उसकी आत्मा और मन जीवन भर असंतोष और तकलीफों भरा होगा। तो कैदी का जीवन भी कुछ ऐसा ही है अगर वो अपने द्वार किए गए अन्याय और अपराध का अगर पश्चाताप करता है। और धर्म का रास्ता अपना लेता है...