परमात्मा ही सब कुछ है।
गुरु देव जम्भेश्वर भगवान की शब्दवाणी 🙏
गुरु महाराज जम्भेश्वर भगवान स्वयं विष्णु के अवतार माने जाते है।गुरु महाराज ने अपनी शब्दवाणी में कहा था, की जब धरती पर कुछ नही था , चारो तरफ अंधकार ही अंधकार था, ना सूर्य था, न चंद्र था, ना सागर था ना अग्नि थी, ना धरती थी ना शेष नाग था, सब कुछ छोटे छोटे कणों में विलीन था, जब कुछ नही था तब भी मैं था। इसका तात्पर्य यह है की गुरु महाराज जम्भेश्वर भगवान स्वयं ही परमात्मा थे।
उन्होंने धरती पर धर्म की स्थापना के लिए अवतार लिया
उन्होंने कहा कि ब्रह्मा,विष्णु, महेश, श्री राम, हनुमान, परशुराम, श्री कृष्ण, सब परमात्मा के ही रूप है। जितने भी अवतार हुए सब परमात्मा परमेश्वर के ही रूप है। या ये कहो ये सब स्वयं परमात्मा ही थे।
यानी ईश्वर/परमात्मा एक है। उनके रूप अनेक है।
गुरु महाराज जम्भेश्वर भगवान की जीवनी
इनका जन्म राजस्थान के नागौर परगने के पीपासर गांव में एक राजपूत परिवार में विक्रमी संवत् 1508 सन 1451 भादवा वदी अष्टमी को अर्धरात्रि कृतिका नक्षत्र में हुआ था।
गुरू जम्भेश्वर''' बिश्नोई संप्रदाय के संस्थापक थे। ये जाम्भोजी के नाम से भी जाने जाते है। इन्होंने विक्रमी संवत् 1542 सन 1485 मे बिश्नोई पंथ की स्थापना की। 'हरि' नाम का वाचन किया करते थे। हरि [विष्णु|भगवान विष्णु]] का एक नाम हैं। बिश्नोई शब्द मूल रूप से निकला है, जिसका अर्थ है '29 नियमों का पालन करने वाला'। गुरु जम्भेश्वर का मानना था कि भगवान सर्वत्र है। वे हमेशा वृक्ष|पेड़] पौधों वन एवं वन्यजीवों सभी जानवरों पृथ्वी पर चराचर सभी जीव जंतुओं की रक्षा करने का संदेश देते थे। इन्होंंनेे जात पात, छुआछूत, स्त्री पुरुष में भेदभाव,जीव हत्या पेड़ पौधों की कटाई ,नशे पत्ते जैसी सामाजिक कुरीतियों को दूर किया व स्वच्छता को बढ़ावा दिया ये जीव हत्या को पाप मानते थें। शुद्ध शाकाहारी भोजन खाने कि बात समझाते थें।
गुरु महाराज ने मूर्ति पूजा का विरोध किया था और हमेशा मूर्ति पूजा करने के लिया मना किया था
गुरुदेव ने कहा कि सभी लोग परमात्मां का स्मरण करो सिर्फ परमात्म को याद करो । सब कुछ एक ही है। परम पिता परमेश्वर ही सब कुछ है। उनको याद करोगे तो सबका उद्धार हो जायेगा।
गुरुदेव ने 29 नियम बताए , इन नियमों का पालन करने वाले बिश्नोई कहलाए।
गुरुदेव ने कहा कि मेरे बताए गए रास्ते और नियमों पर चलने वाला का उद्धार होगा, जन्म मृत्यु से छुटकारा मिलेगा।
और आत्मा को शान्ति मिलेगी। सबका उद्धार होगा।
गुरु जम्भेश्वर का मन्दिर मुकाम, बीकानेर, राजस्थान
नोट: हमारे लेखन में परमात्मा के स्मरण और गुरुदेव जंभेश्वर भगवान की शब्दवाणी की जानकारी दी गई है।
हमारा तात्पर्य किसी भी धर्म या जाति विशेष की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है। हमारे लिए सब बराबर है। सब सर्वोपरि है।
हम किसी भी धर्म या जाति विशेष की कोई बात का कोई दावा नही करते है।
हमने सिर्फ मन की भावना बताई है।
SupercopRaksa की कलम से
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